मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के विशाल कोयला भंडारों का व्यावहारिक लाभ उठाने और कोयला गैसीकरण (Coal Gasification) के माध्यम से औद्योगिक विकास को गति देने के लिए एक समर्पित 'कोयला गैसीकरण नीति' तैयार करने का निर्णय लिया है. इस नीति निर्माण के लिए मध्य प्रदेश औद्योगिक विकास निगम (MPIDC) को नोडल एजेंसी नामित किया गया है. मुख्यमंत्री कार्यालय और ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई के निर्देशों के अनुसार, MPIDC अन्य राज्यों की कोयला गैसीकरण नीतियों का गहन अध्ययन करने के बाद मध्य प्रदेश के लिए नीति का मसौदा तैयार करेगी.
यह नीति न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेगी बल्कि बिजली, उर्वरक, रसायन और मेथनॉल आधारित उद्योगों को भी नई रफ्तार देगी. केंद्र सरकार के राष्ट्रीय कोयला गैसीकरण मिशन और हाल ही में स्वीकृत ₹37,500 करोड़ की वित्तीय प्रोत्साहन योजना के आलोक में मध्य प्रदेश का यह कदम अत्यंत रणनीतिक माना जा रहा है.
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कोयला गैसीकरण क्या है और यह कैसे काम करता है
पारंपरिक रूप से कोयले का उपयोग बिजली संयंत्रों में सीधे जलाकर किया जाता है, जिससे भारी मात्रा में वायु प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन होता है. इसके विपरीत, कोयला गैसीकरण (Coal Gasification) एक ऐसी स्वच्छ कोयला तकनीक है, जिसमें कोयले को सीधे जलाने के बजाय रासायनिक प्रक्रिया के माध्यम से उसे उपयोगी गैस में परिवर्तित किया जाता है.
इस प्रक्रिया में, कोयले को उच्च तापमान और दाब पर ऑक्सीजन और भाप की नियंत्रित मात्रा के साथ आंशिक रूप से ऑक्सीकृत (Partial Oxidation) किया जाता है. इसके परिणामस्वरूप एक बहुपयोगी गैस मिश्रण तैयार होता है जिसे सिंथेटिक गैस (Synthetic Gas) या सिनगैस (Syngas) कहा जाता है. सिनगैस मुख्य रूप से कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) और हाइड्रोजन (H2) का मिश्रण होती है. इसके साथ ही इसमें कार्बन डाइऑक्साइड (CO2), मीथेन (CH4) और जल वाष्प भी अल्प मात्रा में पाए जाते हैं.
रासायनिक समीकरण:
3C (Coal)+O2+H2O→H2+3CO
हाइड्रोजन की मात्रा बढ़ाने के लिए वाटर-गैस शिफ्ट (Water-Gas Shift) अभिक्रिया कराई जाती है :
CO+H2O→CO2+H2
सिनगैस के परिशोधन के बाद, इसका उपयोग विभिन्न प्रकार के मूल्यवर्धित उत्पादों के निर्माण में किया जाता है :
उर्वरक (Fertilizers): यूरिया और अमोनिया का उत्पादन, जो कृषि क्षेत्र के लिए रीढ़ की हड्डी हैं.
मेथनॉल और डाइमिथाइल ईथर: स्वच्छ ईंधन के रूप में और रासायनिक उद्योगों में विलायक के रूप में उपयोग.
सिंथेटिक प्राकृतिक गैस (SNG): आयातित एलएनजी (LNG) के विकल्प के रूप में.
हाइड्रोजन: स्वच्छ ऊर्जा और ईंधन सेल प्रौद्योगिकी के लिए उत्कृष्ट स्रोत.
मध्य प्रदेश में कोयला भंडार और क्षेत्रीय वितरण
मध्य प्रदेश भारत के सबसे समृद्ध कोयला उत्पादक राज्यों में से एक है, जो देश में कुल कोयला भंडार के मामले में तीसरे स्थान पर आता है. राज्य में कुल अनुमानित कोयला भंडार लगभग 33 अरब टन है, जिसमें से केवल 7 प्रमुख जिलों में ही 14.6 अरब टन कोयला मौजूद है.
मध्य प्रदेश में कोयला भंडार का जिला-वार और कोलफील्ड-वार विवरण निम्नलिखित तालिका में दिया गया है :
| जिला / कोलफील्ड | अनुमानित कोयला भंडार | मुख्य विशेषताएं और विकास क्षमता |
|---|---|---|
| सिंगरौली (Singrauli) | 9.12 अरब टन (9,121 मिलियन टन) | राज्य का सबसे बड़ा कोयला क्षेत्र; इसमें झिंगुरदा और पुरेवा जैसी मोटी परतें हैं, जो अर्ध-कोकिंग (Semi-coking) कोयले से समृद्ध हैं. |
| सोहागपुर (Sohagpur - शहडोल) | 4.06 अरब टन (4,064 मिलियन टन) | क्षेत्रफल की दृष्टि से मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा कोयला क्षेत्र; साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) द्वारा संचालित. |
| उमरिया (Umaria) | ~181.29 मिलियन टन | सोन घाटी क्षेत्र का हिस्सा; उच्च नमी (7-10%) और राख (18-29%) वाले गैर-कोकिंग कोयले के भंडार, जो गैसीकरण के लिए उपयुक्त हैं. |
| अनूपपुर (Anuppur) | करोड़ों टन सक्रिय भंडार | सोहागपुर कोयला क्षेत्र की कोटमा उप-बेसिन का हिस्सा; यहां SECL की कई सक्रिय खदानें संचालित हैं. |
| शहडोल (Shahdol) | सोहागपुर कोलफील्ड का प्रमुख हिस्सा | गोंडवाना युग के निक्षेप; निम्न रैंक और उच्च वाष्पशील गैर-कोकिंग कोयला जो थर्मल गैस निर्माण के लिए आदर्श है. |
| बैतूल (Betul) | लगभग 1 अरब टन संभावित संसाधन | पाथाखेड़ा (Pathakheda) कोयला क्षेत्र का हिस्सा; सारणी स्थित सतपुड़ा थर्मल पावर स्टेशन को कोयले की मुख्य आपूर्ति यहीं से होती है. |
| छिंदवाड़ा (Chhindwara) | करीब 50 करोड़ टन अनुमानित संसाधन | सतपुड़ा क्षेत्र के पेंच-कान्हा कोयला क्षेत्र का हिस्सा; अर्ध-कोकिंग कोयले के कुछ भंडार मौजूद हैं. |
इसके अतिरिक्त, कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) ने मध्य प्रदेश में खतली छोटी ग्रेफाइट ब्लॉक (Khattali Chhoti Graphite Block) को भी ई-नीलामी के माध्यम से हासिल किया है, जो राज्य में क्रिटिकल मिनरल्स (Critical Minerals) की खोज और विकास को बढ़ावा देगा.
राष्ट्रीय कोयला गैसीकरण मिशन और केंद्रीय नीतियां
मध्य प्रदेश की गैसीकरण नीति भारत सरकार के राष्ट्रीय कोयला गैसीकरण मिशन (2021) के लक्ष्यों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. इस मिशन के तहत केंद्र सरकार ने वर्ष 2030 तक 100 मिलियन टन कोयले के गैसीकरण का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है.
इस राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए भारत सरकार द्वारा निम्नलिखित प्रमुख नीतिगत सुधार और वित्तीय योजनाएं शुरू की गई हैं:
₹37,500 करोड़ की नई प्रोत्साहन योजना: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सरफेस कोयला/लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं के लिए ₹37,500 करोड़ के वित्तीय परिव्यय को मंजूरी दी है. इसके तहत कुल 75 मिलियन टन कोयले के गैसीकरण का लक्ष्य रखा गया है. इस योजना में संयंत्र और मशीनरी की लागत का अधिकतम 20% तक वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान किया जाएगा.
प्रोत्साहन सीमाएं (Capping): योजना के तहत किसी भी एक परियोजना के लिए प्रोत्साहन राशि अधिकतम ₹5,000 करोड़, किसी एकल उत्पाद के लिए ₹9,000 करोड़ (सिंथेटिक नेचुरल गैस और यूरिया को छोड़कर), और किसी एकल कॉर्पोरेट समूह के लिए सभी परियोजनाओं को मिलाकर अधिकतम ₹12,000 करोड़ निर्धारित की गई है.
₹8,500 करोड़ की पूर्ववर्ती योजना: जनवरी 2024 में सरकार ने सरकारी सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) और निजी क्षेत्र के लिए ₹8,500 करोड़ की प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी थी, जिसके तहत वर्तमान में ₹6,233 करोड़ की आठ परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं.
राजस्व हिस्सेदारी में 50% की छूट: वाणिज्यिक कोयला ब्लॉक नीलामियों में गैसीकरण के लिए उपयोग किए जाने वाले कोयले पर राजस्व हिस्सेदारी (Revenue Share) में 50% की छूट प्रदान की गई है, बशर्ते कि कुल कोयला उत्पादन का कम से कम 10% गैसीकरण के लिए उपयोग किया जाए.
कोयला लिंकेज अवधि में विस्तार: 'सिनगैस उत्पादन' उप-क्षेत्र के तहत कोयला लिंकेज की अवधि को बढ़ाकर 30 वर्ष तक कर दिया गया है, जिससे निवेशकों को दीर्घकालिक नीतिगत स्थिरता प्राप्त होगी.
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भारत में प्रमुख कोयला गैसीकरण परियोजनाएं और प्रगति
कोयला गैसीकरण के क्षेत्र में भारत में सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों द्वारा कई मेगा प्रोजेक्ट्स क्रियान्वित किए जा रहे हैं :
तालचर उर्वरक परियोजना, ओडिशा
ओडिशा के अंगुल जिले में स्थित तालचर फर्टीलाइजर्स लिमिटेड (TFL) भारत की पहली कोयला गैसीकरण आधारित अमोनिया-यूरिया परियोजना है. यह परियोजना गेल (GAIL), कोल इंडिया (CIL), राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टीलाइजर्स (RCF) और भारतीय उर्वरक निगम (FCIL) का एक संयुक्त उद्यम (JV) है.
लागत और क्षमता: ₹13,277 करोड़ की अनुमानित लागत वाली यह परियोजना प्रति वर्ष 1.27 मिलियन मीट्रिक टन नीम-लेपित यूरिया का उत्पादन करेगी.
तकनीक और फीडस्टॉक: यह परियोजना वायु तरलीकृत (Air Liquide) गैसीकरण तकनीक का उपयोग करेगी और तालचर खदानों से प्रति वर्ष 2.5 मिलियन टन कोयले का उपयोग करेगी, जिसमें उच्च राख सामग्री को नियंत्रित करने के लिए 25% तक पेट-कोक मिलाया जाएगा.
वर्तमान स्थिति: चीनी ठेकेदार वुहान इंजीनियरिंग (Wuhuan Engineering) के साथ तकनीकी और वाणिज्यिक विवादों के कारण यह परियोजना लगभग 4 वर्ष की देरी से चल रही है और अब इसके दिसंबर 2027 तक चालू होने की उम्मीद है.
अन्य सरकारी और निजी परियोजनाएं
भारत सरकार ने कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) के माध्यम से कई नए संयुक्त उपक्रमों को मंजूरी दी है, जिन्हें तालिका में देखा जा सकता है :
| परियोजना / संयुक्त उद्यम | स्थान | उद्देश्य और उत्पाद | अनुमानित समय सीमा |
|---|---|---|---|
| भारत कोल गैसीफिकेशन एंड केमिकल्स लिमिटेड (BCGCL) | लखनपुर, ओडिशा | CIL और भेल (BHEL) का संयुक्त उद्यम; कोयला आधारित अमोनियम नाइट्रेट संयंत्र. | वर्ष 2029-30 |
| कोल गैस इंडिया लिमिटेड (CGIL) | बर्धमान, पश्चिम बंगाल | CIL और गेल (GAIL) का संयुक्त उद्यम; कोयला-से-SNG संयंत्र. | वर्ष 2029-30 |
| वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (WCL) परियोजना | चंद्रपुर, महाराष्ट्र | कोल इंडिया की अपनी परियोजना; कोयला-से-SNG उत्पादन. | वर्ष 2029-30 |
| जिंदल स्टील लिमिटेड (JSL) परियोजना | अंगुल, ओडिशा | निजी क्षेत्र की परियोजना; स्पंज आयरन (DRI) उत्पादन के लिए गैसीकरण. | वर्ष 2029-30 |
| ग्रेटा एनर्जी एंड मेटल प्राइवेट लिमिटेड | चंद्रपुर, महाराष्ट्र | निजी क्षेत्र की परियोजना; DRI उत्पादन हेतु गैसीकरण संयंत्र. | वर्ष 2029-30 |
| न्यू एरा क्लीनटेक सॉल्यूशन | चंद्रपुर, महाराष्ट्र | निजी क्षेत्र की परियोजना; अमोनियम नाइट्रेट और हाइड्रोजन का उत्पादन. | वर्ष 2029-30 |
रणनीतिक और आर्थिक महत्व: आयात प्रतिस्थापन और आत्मनिर्भरता
भारत की वर्तमान आयात निर्भरता देश की राजकोषीय स्थिति और आपूर्ति श्रृंखला की स्थिरता के लिए एक गंभीर चुनौती है. इस परिदृश्य में कोयला गैसीकरण कई मोर्चों पर गेम-चेंजर साबित हो सकता है :
आयात प्रतिस्थापन (Import Substitution): भारत वर्तमान में अपनी अमोनिया की लगभग संपूर्ण आवश्यकताओं, मेथनॉल के 80-90% और यूरिया के लगभग 20% आवश्यकताओं के लिए विदेशी आयात पर निर्भर है. इसके अतिरिक्त, देश अपनी प्राकृतिक गैस (LNG) आवश्यकताओं का 50% से अधिक हिस्सा आयात करता है. कोयला गैसीकरण के माध्यम से इन रसायनों का घरेलू उत्पादन करके भारत प्रति वर्ष लगभग ₹3 लाख करोड़ तक की विदेशी मुद्रा की बचत कर सकता है.
रोजगार और क्षेत्रीय विकास: ₹37,500 करोड़ की नई प्रोत्साहन योजना के तहत देश के कोयला उत्पादक क्षेत्रों में लगभग 25 परियोजनाओं के माध्यम से 50,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने का अनुमान है.
ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security): वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों और मूल्य अस्थिरता के बीच घरेलू कोयला भंडार (भारत में 401 अरब टन कोयला और 47 अरब टन लिग्नाइट भंडार हैं) का कुशल उपयोग करके भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है.
पर्यावरणीय धारणीयता (Environmental Sustainability): यह प्रक्रिया 'विकसित भारत 2047' के दृष्टिकोण के अनुरूप है, क्योंकि पारंपरिक कोयला दहन की तुलना में यह ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने का एक व्यावहारिक और स्वच्छ विकल्प प्रदान करती है.
राष्ट्रीय महत्व के ऐसे रणनीतिक आर्थिक सुधारों पर विस्तृत वैचारिक स्पष्टता के लिए आप सरकारी प्रेस विज्ञप्तियों का संदर्भ(https://www.pib.gov.in) पर ले सकते हैं.
Why this matters for your exam preparation
मध्य प्रदेश की नई कोयला गैसीकरण नीति और केंद्र सरकार का स्वच्छ ऊर्जा अभियान संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोग (जैसे MPPSC) की परीक्षाओं के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं:
प्रारंभिक परीक्षा (UPSC Prelims):
भूगोल (Geography): गोंडवाना युग के कोयला क्षेत्रों (जैसे सिंगरौली, सोहागपुर, उमरिया और पेंच-कान्हा) का भौगोलिक वितरण और कोयले के प्रकारों (कोकिंग बनाम गैर-कोकिंग) पर सीधे प्रश्न पूछे जा सकते हैं.
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (S&T): सिनगैस (Syngas) के घटक (CO और H2), वाटर-गैस शिफ्ट रिएक्शन और गैसीकरण प्रक्रिया की तकनीकी बारीकियां प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं.
सरकारी योजनाएं: राष्ट्रीय कोयला गैसीकरण मिशन (2021) और नई ₹37,500 करोड़ की प्रोत्साहन योजना के प्रमुख वित्तीय और तकनीकी प्रावधान.
मुख्य परीक्षा (UPSC Mains - GS Paper III):
ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण: "क्या कोयला गैसीकरण भारत के 2070 के शुद्ध-शून्य (Net-Zero) लक्ष्य को प्राप्त करने में एक 'ब्रिज फ्यूल' (Bridge Fuel) के रूप में कार्य कर सकता है?" इस विषय पर मुख्य परीक्षा में विश्लेषणात्मक प्रश्न बनने की उच्च संभावना है.
आर्थिक विकास और बुनियादी ढांचा: आयात निर्भरता को कम करने, चालू खाता घाटा (CAD) को संतुलित करने और आत्मनिर्भर भारत अभियान को सुदृढ़ करने में इस तकनीक के महत्व पर चर्चा करने वाले प्रश्न पूछे जा सकते हैं.
आपदा प्रबंधन और प्रदूषण: पारंपरिक कोयला दहन की तुलना में गैसीकरण के पर्यावरणीय लाभ और कार्बन कैप्चर (CCUS) तकनीक के साथ इसका एकीकरण.
राज्य सेवा परीक्षा (MPPSC Mains - GS Paper III):
मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था और खनिज संसाधन क्षेत्र में इस नई राज्य नीति के प्रभाव, MPIDC की नोडल भूमिका, और सिंगरौली तथा शहडोल संभाग के औद्योगिक विकास की संभावनाओं पर केंद्रित प्रश्न राज्य-विशिष्ट सामान्य अध्ययन के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं.