Current Affairs 5 March 2026: सूक्ष्मजीवों से निकला यूरिया का विकल्प – ब्राजील की Co‑Inoculation तकनीक
ब्राजील की कृषि वैज्ञानिक Mariangela Hungria ने मिट्टी के लाभकारी सूक्ष्मजीवों की मदद से सोयाबीन में नाइट्रोजन की आपूर्ति का ऐसा मॉडल विकसित किया है, जो यूरिया जैसे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता को काफी हद तक खत्म कर देता है। यह मॉडल “जैविक नाइट्रोजन स्थिरीकरण (Biological Nitrogen Fixation – BNF)” और “co‑inoculation” तकनीक पर आधारित है, जिसे Embrapa (Brazilian Agricultural Research Corporation) ने प्रमाणित किया है।
पृष्ठभूमि: पारंपरिक यूरिया‑आधारित कृषि की समस्या
पारंपरिक कृषि में नाइट्रोजन आपूर्ति के लिए यूरिया और अन्य सिंथेटिक N उर्वरकों का बड़े पैमाने पर उपयोग होता है, जिससे मिट्टी की उर्वरता, जैव विविधता और जल‑वायु प्रदूषण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यह मॉडल ऊर्जा‑सघन औद्योगिक प्रक्रियाओं (हैबर–बॉश) पर भी निर्भर है, जो वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में योगदान देता है।
यूरिया के अत्यधिक उपयोग से नाइट्रोजन लीचिंग, नाइट्रस ऑक्साइड (N₂O) जैसे शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन और भू‑जल प्रदूषण बढ़ता है, इसलिए विश्व स्तर पर नाइट्रोजन‑प्रबंधन के टिकाऊ विकल्पों की तलाश की जा रही है।
मुख्य अवधारणा: जैविक नाइट्रोजन स्थिरीकरण (Biological Nitrogen Fixation – BNF)
जैविक नाइट्रोजन स्थिरीकरण वह प्रक्रिया है, जिसमें कुछ विशेष बैक्टीरिया वायुमंडलीय नाइट्रोजन गैस को पौधों के लिए उपयोगी अमोनिया रूप में बदल देते हैं।
लेग्युम (जैसे सोयाबीन) की जड़ों में Rhizobium/Bradyrhizobium जैसे बैक्टीरिया नोड्यूल बनाकर नाइट्रोजन स्थिर करते हैं।
ब्राजील में सोयाबीन की फसल में BNF के माध्यम से प्रति हेक्टेयर 300 किलोग्राम से अधिक नाइट्रोजन उपलब्ध कराई जा चुकी है, जिससे बिना रासायनिक N उर्वरक के भी 5000 किलोग्राम/हेक्टेयर तक की पैदावार संभव हुई है।
इसी BNF क्षमता को अधिकतम करने के लिए Hungria और उनकी टीम ने उन्नत Rhizobium स्ट्रेन और co‑inoculation तकनीक विकसित की है।
Rhizobium आधारित जैव उर्वरक: सोयाबीन की जड़ों के साथ सहजीवी संबंध
Hungria ने Rhizobium/Bradyrhizobium के उन्नत स्ट्रेन विकसित किए, जो सोयाबीन की जड़ों के साथ मजबूत सहजीवी (symbiotic) संबंध बनाते हैं।
ये बैक्टीरिया जड़ के नोड्यूल में रहकर वायुमंडलीय N₂ को अमोनिया में बदलते हैं, जो सीधे पौधे को नाइट्रोजन पोषण देता है।
Embrapa के शोध में पाया गया कि ऐसे inoculation से उच्च उपज प्राप्त की जा सकती है, जबकि अतिरिक्त रासायनिक N उर्वरक की आवश्यकता नहीं पड़ती।
ब्राजील में सोयाबीन पर Rhizobium‑आधारित जैव‑उर्वरकों के प्रयोग ने देश की सोयाबीन अर्थव्यवस्था को अधिक प्रतिस्पर्धी और पर्यावरण‑अनुकूल बनाने में अहम भूमिका निभाई है।
Co‑Inoculation तकनीक: Rhizobium + Azospirillum का संयुक्त उपयोग
Hungria की सबसे बड़ी तकनीकी उपलब्धि co‑inoculation तकनीक है, जिसमें Rhizobium के साथ Azospirillum नामक एक और लाभकारी सूक्ष्मजीव का संयुक्त प्रयोग किया जाता है।
Rhizobium/Bradyrhizobium: नोड्यूल बनाकर वायुमंडलीय नाइट्रोजन स्थिर करता है और फसल की N जरूरत पूरी करता है।
Azospirillum brasilense: plant growth‑promoting rhizobacteria (PGPR) है, जो जड़ वृद्धि, root hair निर्माण और सूखे के प्रति सहनशीलता को बढ़ाता है।
Embrapa के फील्ड ट्रायल्स में पाया गया कि Bradyrhizobium और Azospirillum के co‑inoculation से:
केवल Bradyrhizobium की तुलना में औसतन लगभग 14.7% अधिक अनाज उपज और 16.4% अधिक नाइट्रोजन संचयन दर्ज किया गया।
कई अध्ययनों में co‑inoculation को N उर्वरकों का पर्यावरण‑अनुकूल विकल्प बताया गया है, जो अच्छी उपज बनाए रखते हुए रासायनिक N की आवश्यकता को कम कर सकता है।
ब्राजील में बड़े पैमाने पर अपनाया गया मॉडल
ब्राजील ने सोयाबीन जैसी आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण फसल में BNF और co‑inoculation को व्यवस्थित रूप से अपनाया है।
हाल के आकलनों के अनुसार, केवल पाँच वर्षों में co‑inoculation तकनीक ब्राजील की कुल सोयाबीन क्षेत्रफल के लगभग 25% हिस्से पर लागू हो चुकी है, जो लगभग 1 करोड़ (10 मिलियन) हेक्टेयर के बराबर है।
शोध बताते हैं कि co‑inoculation और सूक्ष्मजीवी inoculants की मदद से बिना रासायनिक N उर्वरक के भी उच्च उपज प्राप्त की जा सकती है, जिससे उत्पादन‑लागत और पर्यावरणीय प्रभाव दोनों कम होते हैं।
यह मॉडल भारत जैसे देशों के लिए भी संकेत देता है कि यदि वैज्ञानिक शोध, नीति‑समर्थन और किसान‑प्रशिक्षण साथ‑साथ हों, तो बड़ी मात्रा में यूरिया आयात और सब्सिडी पर निर्भरता घटाई जा सकती है।
कार्बन उत्सर्जन और वैश्विक डी‑कार्बोनाइजेशन में योगदान
रासायनिक N उर्वरकों के निर्माण में भारी ऊर्जा और जीवाश्म ईंधन की जरूरत होती है, जबकि खेत में इनके उपयोग से N₂O उत्सर्जन होता है, जो CO₂ की तुलना में कहीं अधिक शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैस है।
जैविक N स्थिरीकरण आधारित मॉडल रासायनिक N उर्वरकों के उपयोग को कम करके energy‑related CO₂ और field‑level N₂O दोनों उत्सर्जन घटाने में मदद करता है।
co‑inoculation जैसे microbial inoculants “low‑carbon agriculture” की दिशा में व्यावहारिक और कम‑लागत समाधान प्रस्तुत करते हैं, जिन्हें कई अंतरराष्ट्रीय शोध sustainable intensification के उदाहरण के रूप में उद्धृत करते हैं।
इस प्रकार Embrapa द्वारा प्रमाणित तकनीक वैश्विक डी‑कार्बोनाइजेशन प्रयासों में एक प्रभावी मॉडल के रूप में उभर रही है।
Key Points for UPSC, SSC, State PCS (बुलेट नोट्स)
Mariangela Hungria – ब्राजील की कृषि वैज्ञानिक, जिन्होंने सोयाबीन में biological nitrogen fixation और co‑inoculation पर प्रमुख शोध किया।
Biological Nitrogen Fixation (BNF) – Rhizobium/Bradyrhizobium जैसी बैक्टीरिया प्रजातियाँ वायुमंडलीय N₂ को अमोनिया में बदलकर लेग्युम फसलों को नाइट्रोजन देती हैं।
Rhizobium/Bradyrhizobium – सोयाबीन की जड़ों में नोड्यूल बनाकर N आपूर्ति करने वाले सूक्ष्मजीव; इन्हीं पर आधारित inoculants ब्राजील में बड़े पैमाने पर उपयोग हो रहे हैं।
Azospirillum brasilense – plant growth‑promoting rhizobacteria (PGPR); जड़‑विकास, root hairs और drought tolerance बढ़ाता है, जिससे Rhizobium की efficiency भी सुधरती है।
Co‑Inoculation – Bradyrhizobium + Azospirillum का संयुक्त inoculation; Embrapa के अध्ययनों में उपज में ~14.7% वृद्धि और अनाज में N संचयन में ~16.4% वृद्धि दर्शाई गई।
Adoption Scale – पाँच वर्षों में co‑inoculation ब्राजील की लगभग 25% सोयाबीन क्षेत्र (लगभग 10 मिलियन हे.) पर अपनाया गया।
Environmental Benefit – N उर्वरकों पर निर्भरता घटने से CO₂ व N₂O उत्सर्जन कम, मिट्टी की सेहत बेहतर और sustainable agriculture को बढ़ावा।
संभावित प्रश्न‑रूप (Prelims, Mains, Interview)
Prelims (Objective)
Biological Nitrogen Fixation के संदर्भ में सही कथन चुनिए:
(a) यह केवल cyanobacteria द्वारा किया जाता है
(b) Rhizobium सोयाबीन की जड़ों में नोड्यूल बनाकर नाइट्रोजन स्थिर कर सकता है
(c) Azospirillum केवल फॉस्फोरस घुलनशील बनाता है
(d) co‑inoculation हमेशा रासायनिक N उर्वरक से कम उपज देता है
Co‑inoculation तकनीक में सामान्यतः किन सूक्ष्मजीवों का संयोजन प्रयोग होता है?
(a) Rhizobium और Azospirillum
(b) Azotobacter और Lactobacillus
(c) Pseudomonas और Rhizopus
(d) Nostoc और Anabaena
Why this matters for your exam preparation
Syllabus Mapping (UPSC CSE – GS & Optional):
GS‑III: Agriculture, Major crops, irrigation and fertilizers, issues of buffer stocks and food security, environmental pollution and degradation, conservation & climate change – सभी से सीधे जुड़ा टॉपिक।
GS‑III: “Efforts for low‑carbon and climate‑resilient agriculture” पर उत्तर लिखते समय आप Brazil के इस मॉडल को केस‑स्टडी की तरह प्रयोग कर सकते हैं।
Geography/Environment optional, NABARD, ICAR, Forest services, State PCS (Agriculture/Environment) में भी biofertilizers, BNF, PGPR जैसे शब्दों पर प्रश्न आ सकते हैं।
Prelims Edge (Concept + Application):
UPSC अक्सर स्टैटिक + करंट को मिलाकर पूछता है – जैसे “Biological nitrogen fixation”, “PGPR”, “biofertilizer vs chemical fertilizer” पर factual स्टेटमेंट्स के रूप में MCQs बनते हैं।
इस खबर से आप co‑inoculation, Rhizobium, Azospirillum, BNF, N₂O emissions, low‑carbon agriculture जैसे keywords और उनके linking‑points को अच्छी तरह याद रख सकते हैं।
Mains Answer Enrichment (Case Study & Examples):
जब आप “Doubling farmers’ income”, “सस्टेनेबल कृषि”, “उर्वरक सब्सिडी भार”, या “climate‑smart agriculture” पर उत्तर लिखेंगे, तो Brazil का यह मॉडल एक strong international example के रूप में quote कर सकते हैं।
“India can learn from…” प्रकार के प्रश्नों में आप सुझाव दे सकते हैं कि भारत में सोयाबीन, दालें और तिलहन क्षेत्र में co‑inoculation जैसी तकनीकें अपनाकर यूरिया‑सब्सिडी, import bill और emissions घटाए जा सकते हैं।
Interview Perspective (Personality Test):
यदि आपका background agriculture/science से है, या आप environment/GS‑III से जुड़े किसी उत्तर पर discussion में जाते हैं, तो आप Hungria के काम और Embrapa मॉडल का उदाहरण देकर अपनी scientific awareness और global perspective दिखा सकते हैं।
आगे की ऐसी ही exam‑oriented current affairs कवरेज के लिए
UPSC Current Affairs Daily – Atharva Examwise
को नियमित रूप से फॉलो करना आपके लिए उपयोगी रहेगा।